How to The Role of Social Media in Society part-2
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सोशल मीडिया का असली चेहरा: कैसे झूठ और नफरत से रची जाती है राजनीति की चाल
लेखक: Fun Ka Pitara
दिनांक: 28/4/2025
श्रेणी: समाज, मीडिया, विचार
प्रस्तावना: सोशल मीडिया बन गया है नफरत फैलने वाला हथीयार
आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन या जानकारी का ज़रिया नहीं रहा। यह एक ऐसा मंच बन चुका है जहां देश की राजनीति अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए नफरत की नई स्क्रिप्ट लिखती है। आम जनता को असली मुद्दों से भटकाने के लिए मज़हब के नाम पर ज़हर बोया जाता है। देश के कुछ नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए सोशल मिडियाका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं जिसके कारण देश में नफरत,फैलतीं जा रही हैं जिसमे कुछ न्यूज चैनल भी बहुत आगे है
झूठा प्रोपगंडा: जब सच्चाई दबाई जाती है
हर बार जब सरकार से सवाल किए जाने लगते हैं — महंगाई, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य या शिक्षा पर — तो सोशल मीडिया पर अचानक एक नया मुद्दा उछाल दिया जाता है। कभी किसी धर्म विशेष के खिलाफ, कभी किसी समुदाय के नाम पर। ये सब सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए किया जाता है।
मीडिया की भूमिका: सच्चाई नहीं, सिर्फ तमाशा
वो मीडिया जिसे देश की ज़िम्मेदारी निभानी थी, आज TRP की भूख में बिकी हुई नज़र आती है। बड़े-बड़े न्यूज़ चैनल ऐसे डिबेट कराते हैं जो नफरत को हवा दें। खबर नहीं दिखाई जाती, बल्कि जंग का माहौल बनाया जाता है।
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समाज में ज़हर: जब दोस्त दुश्मन बनते हैं
इन झूठी कहानियों का असर हमारे समाज पर सीधा होता है। दो परिवार जो वर्षों से साथ रहते आए हैं, अब एक-दूसरे से शक की निगाहों से देखने लगे हैं। दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी — सब बंट रहे हैं। लोगों में अविश्वास बढ रहा है खानपान से लेकर कारोबार तक जनता में भेदभाव किदिवारों को पक्की करने में सोशल मिडिया का बखूबी रहा है मुझे तो ईस बात का अचंभा होता है कि ईस नफरती माहोल को बढाने मे बडे़ बडे जिम्मेदार देश के सिलेब्रिटी, पढेलिखे समझदार लोग भी शामिल है
अब वक्त है जागने का!
सोशल मीडिया का इस्तेमाल समझदारी से करें। हर वीडियो, पोस्ट, या खबर को बिना जांचे शेयर न करें। अगर हम खुद जागरूक नहीं हुए, तो नफरत बेचने वालों की दुकान चलती रहेगी — और इंसानियत का दीवाला निकल जाए


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